Ram mandir full case story in Hindi | ayodhya mandir ka Faisla | 2019 | Hindi Jankari
हेलो दोस्तो कैसे हो आप सब , आप सभी के मन मे एक सवाल आ रहा होगा कि ये राममंदिर का केस है क्या क्यों लोगो मे इसकी चर्चा है आज मैं आपको राम मंदिर-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद जो 1528 से सुप्रीम कोर्ट में आखिरी दलील तक, 400 साल की पूरी कहानी मैं आप लोगो को बताऊंगा ओर आप लोग अपना विचार कमेंट बॉक्स मैं जरूर शेयर करे।
अयोध्या जमीन विवाद मामला देश के सबसे लंबे चलने वाले केस में से एक है। अयोध्या में विवाद की शुरुआत करीब 400 साल पहले हुई थी, जब वहां मस्जिद का निर्माण हुआ।:--
एक नज़र यहां भी:-
. अयोध्या में विवाद की नींव करीब 400 साल पहले पड़ी थी, जब वहां मस्जिद का निर्माण हुआ।
. असली विवाद शुरू हुआ 23 दिसंबर 1949 को, जब भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में पाई गईं।
. 6 दिसंबर 1992 को बीजेपी, वीएचपी और शिवसेना समेत दूसरे हिंदू संगठनों के लाखों कार्यकर्ताओं ने विवादित ढांचे को गिरा दिया।
अयोध्या में विवादित स्थल पर मालिकाना हक से जुड़े केस में सुप्रीम कोर्ट शनिवार को फैसला सुनवाएगा।
:-चीफ जस्टिस रंजन गागोई की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने इस ऐतिहासिक मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था।
:- सीजेआई अगले महीने 17 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं।
:- अयोध्या जमीन विवाद मामला देश के सबसे लंबे चलने वाले केस में से एक है। मगर क्या आपको पता है कि इस विवाद की नींव कब पड़ी। अयोध्या में विवाद की नींव करीब 400 साल पहले पड़ी थी, जब वहां मस्जिद का निर्माण हुआ।
:- आइए आपको बताते हैं कि अयोध्या में विवाद कब से शुरू हुई और कब-कब क्या हुआ। ओर अपना जवाब कमेंट्स मैं जरूर बताइयेगा की निर्णय कैसा होना चाइये था।
ये बात है:-
1528:- मुगल बादशाह बाबर ने (विवादित जगह पर) मस्जिद का निर्माण कराया। इसे लेकर हिंदुओं का दावा है कि यह जगह भगवान राम की जन्मभूमि है और यहां पहले एक मंदिर था।
1853-1949 तक:- 1853 में इस जगह के आसपास पहली बार दंगे हुए। 1859 में अंग्रेजी प्रशासन ने विवादित जगह के आसपास बाड़ लगा दी। मुसलमानों को ढांचे के अंदर और हिंदुओं को बाहर चबूतरे पर पूजा करने की इजाजत दी गई
1949:- असली विवाद शुरू हुआ 23 दिसंबर 1949 को, जब भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में पाई गईं। हिंदुओं का कहना था कि भगवान राम प्रकट हुए हैं, जबकि मुसलमानों ने आरोप लगाया कि किसी ने रात में चुपचाप मूर्तियां वहां रख दीं। यूपी सरकार ने मूर्तियां हटाने का आदेश दिया, लेकिन जिला मैजिस्ट्रेट के. के. नायर ने दंगों और हिंदुओं की भावनाओं के भड़कने के डर से इस आदेश को पूरा करने में असमर्थता जताई। सरकार ने इसे विवादित ढांचा मानकर ताला लगवा दिया।
1950:- फैजाबाद सिविल कोर्ट में दो अर्जी दाखिल की गई। इसमें एक में राम लला की पूजा की इजाजत और दूसरे में विवादित ढांचे में भगवान राम की मूर्ति रखे रहने की इजाजत मांगी गई।
1959:- में निर्मोही अखाड़ा ने तीसरी अर्जी दाखिल की।
1961:- यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अर्जी दाखिल कर विवादित जगह के पजेशन और मूर्तियां हटाने की मांग की।
1984:- विवादित ढांचे की जगह मंदिर बनाने के लिए 1984 में विश्व हिंदू परिषद ने एक कमिटी गठित की।
1986:- यू. सी. पांडे की याचिका पर फैजाबाद के जिला जज के. एम. पांडे ने 1 फरवरी 1986 को हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत देते हुए ढांचे पर से ताला हटाने का आदेश दिया।
6 दिसंबर 1992:- बीजेपी, वीएचपी और शिवसेना समेत दूसरे हिंदू संगठनों के लाखों कार्यकर्ताओं ने विवादित ढांचे को गिरा दिया। देश भर में हिंदू-मुसलमानों के बीच दंगे भड़के गए, जिनमें 2 हजार से ज्यादा लोग मारे गए।
2002:- हिंदू कार्यकर्ताओं को ले जा रही ट्रेन में गोधरा में आग लगा दी गई, जिसमें 58 लोगों की मौत हो गई। इसकी वजह से हुए दंगे में 2 हजार से ज्यादा लोग मारे गए।
2010:- इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित स्थल को सुन्नी वक्फ बोर्ड, रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़ा के बीच 3 बराबर-बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया।
2011:- सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई।
2017:- सुप्रीम कोर्ट ने आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट का आह्वान किया। बीजेपी के शीर्ष नेताओं पर आपराधिक साजिश के आरोप फिर से बहाल किए।
8 मार्च 2019:- सुप्रीम कोर्ट ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा। पैनल को 8 सप्ताह के अंदर कार्यवाही खत्म करने को कहा।
1 अगस्त 2019:- मध्यस्थता पैनल ने रिपोर्ट प्रस्तुत की।
2 अगस्त 2019:- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता पैनल मामले का समाधान निकालने में विफल रहा।
6 अगस्त 2019:- सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की रोजाना सुनवाई शुरू हुई।
16 अक्टूबर 2019:- अयोध्या मामले की सुनवाई पूरी। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।
09 नवंबर 2019:- सुप्रीम कोर्ट का फैसला राम मंदिर बनवाने के हित मे आया और मुस्लिमों के लिए दूसरी जगह देने को कहा गया।
फैसला अब राम मंदिर के हित मे है अब यह मंदिर बनेगा। ये फैसला धर्म के आधार पर नही किआ गया है ये सब सबूतों के आधार पर किआ गया है ये सब कोर्ट का कहना है|
और मस्जिद के लिए अलग से जगह दी जाएगी दोस्तो जो बात थी मैन आप सभी को बता दी अब आप लोग बराए के निर्णय सही ह या गलत आपके हिसाब से क्या फैसला होना चाइये था
कमेंट्स जरूर करे ताकि मैं आप सब की राय जान सकूँ।
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